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डिलीवरी के बाद घटाà¤à¤‚ पेट:मां बनने के बाद महिलाà¤à¤‚ कॉटन साड़ी से बांधती हैं पेट, à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ से जानें इसके फायदे
बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देना मां के लिठà¤à¥€ à¤à¤• नया जनà¥à¤® होता है इसलिà¤, मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर को खास देखà¤à¤¾à¤² की जरूरत होती है। महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में मां बनने के बाद महिलाà¤à¤‚ पेट पर कॉटन साड़ी बांधती हैं। कà¥à¤¯à¤¾ है à¤à¤¸à¤¾ करने की वजह और इसके फायदे, ये जानने के लिठहमने बात की गायनाकोलॉजिसà¥à¤Ÿ डॉ. नंदिता पालशेतकर और पीडियाटà¥à¤°à¥€à¤¶à¤¨ डॉ. गीतांजलि शाह से।
कमर में साड़ी बांधने के फायदे
मां बनने के बाद महिलाओं की मालिश से लेकर पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार तक, हर तरह से उनकी विशेष देखà¤à¤¾à¤² की जाती है। महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में मां बनने के बाद महिलाà¤à¤‚ पेट पर पूरी साड़ी बांधती हैं। इसके बारे में बताते हà¥à¤ बà¥à¤²à¥‚म आईवीà¤à¤« की मेडिकल डायरेकà¥à¤Ÿà¤° गायनाकोलॉजिसà¥à¤Ÿ नंदिता पालशेतकर कहती हैं, “मां बनने के बाद महिलाओं की पेट की मसलà¥à¤¸ ढीली हो जाती हैं और पेट को बांधने से वो अपनी जगह पर फिट हो जाती हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हील होने में मदद मिलती है। महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में मां की मालिश के बाद दाई उसके पेट पर पूरी साड़ी (नौ वारी साड़ी) को टाइट बांध देती है, जिससे महिला को आराम मिलता है। कॉटन साड़ी का फायदा है कि ये कंफरà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¤² होती हैं और इनसे महिला को कोई नà¥à¤•सान नहीं होता और वह चाहे तो इसे रात में पहनकर à¤à¥€ सो सकती है। अब साड़ी की जगह बेलà¥à¤Ÿ ने ले ली है, लेकिन महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में अà¤à¥€ à¤à¥€ कई घरों में महिलाà¤à¤‚ पेट पर कॉटन साड़ी ही बांधती हैं। अब तो साड़ी से बनी रेडीमेड बेलà¥à¤Ÿ à¤à¥€ मिलने लगी हैं और महिलाà¤à¤‚ साड़ी की जगह उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहनने लगी हैं। नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी के चार दिन बाद और सीजेरियन डिलीवरी के आठदिन बाद महिलाà¤à¤‚ पेट पर साड़ी या बेलà¥à¤Ÿ बांध सकती हैं, इससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ काफी सपोरà¥à¤Ÿ और आराम मिलता है। डिलीवरी के बाद दो-तीन महीने तक हम महिलाओं को बेलà¥à¤Ÿ पहनने की सलाह देते हैं।â€
à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ है जरूरीपहले बेलà¥à¤Ÿ उपलबà¥à¤§ नहीं थीं इसलिठमहिलाà¤à¤‚ पेट पर साड़ी बांध लेती थीं, लेकिन अब अधिकतर महिलाà¤à¤‚ बेलà¥à¤Ÿ पहनना पसंद करती हैं। डिलीवरी के बाद पेट बांधना बहà¥à¤¤ जरूरी है, इससे पेट की मसलà¥à¤¸ को सपोरà¥à¤Ÿ मिलता है और महिला को आराम आता है। इसलिà¤, हम उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बेलà¥à¤Ÿ बांधने की सलाह देते हैं। लेकिन इतना काफी नहीं है, साड़ी या बेलà¥à¤Ÿ बांधने से पेट की मसलà¥à¤¸ अंदर नहीं जातीं, इसके लिठयोग व à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ à¤à¥€ जरूरी है। इसे हम à¤à¤¸à¥‡ समठसकते हैं, जैसे अलमारी में कपड़े असà¥à¤¤-वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ रखने के बाद दवाजा बंद कर देने से कपड़े बाहर तो नहीं गिरेंगे, लेकिन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सही जगह पर रखने के लिठपहले कपड़ों को अचà¥à¤›à¥€ तरह तह करके रखना होगा। इसी तरह डिलीवरी के बाद पेट बांधने से मसलà¥à¤¸ को आराम तो मिलता है, लेकिन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सही जगह पर फिट करने के लिठकपालà¤à¤¾à¤¤à¤¿, à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² कà¥à¤°à¤‚चेस, पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फà¥à¤²à¥‹à¤°, कीगल जैसी योग व à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ बहà¥à¤¤ जरूरी हैं।"
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